भारतीय मानक ब्यूरो के कोड IS 456:2000 में रेसिडेंशियल और कॉमर्शियल स्लैब कास्टिंग के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित हैं। छत की ढलाई के दिन साइट पर मौजूद रहकर इन 5 गंभीर गलतियों की जांच जरूर करें।
1. स्लैब की मोटाई (Thickness) में कटौती करना
लोकल ठेकेदार कंक्रीट और मजदूरी बचाने के लिए अक्सर छत को 4 इंच (100mm) मोटाई में ढाल देते हैं। सिविल इंजीनियरिंग में स्लैब केवल लोड नहीं उठाती, बल्कि बीम के साथ मिलकर एक मोनोलिथिक डायाफ्राम की तरह काम करती है।
यदि छत की मोटाई कम होगी, तो कमरे के बीच में डिफ्लेक्शन (झुकाव) होगा और छत पर चलने से कंपन (Vibration) महसूस होगा। सामान्य रेसिडेंशियल स्पैन (10 फीट से 14 फीट) के लिए स्लैब की न्यूनतम मोटाई कम से कम 5 इंच (125mm) होनी चाहिए।
2. कवर ब्लॉक और चेयर बार (Chair Bar) न लगाना
यह भारत की साइटों पर होने वाली सबसे घातक गलतियों में से एक है। मिस्त्री कंक्रीट के नीचे ईंट के टुकड़े या गिट्टी लगा देते हैं। स्लैब के लिए हमेशा 20mm के पीवीसी या प्री-कास्ट कंक्रीट कवर ब्लॉक (M20 ग्रेड) का उपयोग करना चाहिए, ताकि सरिए के नीचे 20mm कंक्रीट की परत सुरक्षित रहे।
इसके अलावा, बीम के पास और कोनों पर जो टॉप एक्स्ट्रा सरिया (Crank/Negative Moment Reinforcement) दिया जाता है, मजदूर ढलाई के समय उस पर चढ़कर उसे नीचे फर्श पर दबा देते हैं। अगर टॉप सरिया नीचे दब गया, तो दीवारों के पास की छत अपनी नेगेटिव मोमेंट सहने की क्षमता खो देगी और जोड़ों पर दरारें आ जाएंगी।
3. लेबर की सुविधा के लिए कंक्रीट में जरूरत से ज्यादा पानी मिलाना
मिक्सर मशीन से छत तक कंक्रीट ले जाने में आसानी हो, इसलिए मजदूर बाल्टियों से बार-बार एक्स्ट्रा पानी मिलाते रहते हैं ताकि मसाला पतला बहने लगे। कंक्रीट जितना पतला होगा, सूखने के बाद उसकी कंप्रेसिव स्ट्रेंथ उतनी ही गिर जाएगी।
अतिरिक्त पानी जब वाष्पीकृत (Evaporate) होकर बाहर निकलता है, तो स्लैब के अंदर अनगिनत सूक्ष्म छिद्र (Capillary Pores) छोड़ देता है। इन्हीं छेदों से बारिश का पानी रिसकर नीचे टपकता है और सरिए तक पहुंचकर उसमें जंग लगाता है।
4. गलत जगह पर सरिए का लैपिंग (Lapping Zone Error)
जब एक सरिए की लंबाई खत्म हो जाती है, तो दूसरा सरिया जोड़ने के लिए ओवरलैप (Lap Length) दिया जाता है। ठेकेदार अक्सर जहां सरिया खत्म हुआ वहीं जोड़ देते हैं।
एक स्लैब में कमरे के ठीक बीच वाले हिस्से (Mid-Span) में सबसे ज्यादा तनाव (Maximum Positive Bending Moment) होता है। इसलिए बॉटम सरिए का जोड़ कभी भी कमरे के केंद्र (L/3 से L/2 जोन) में नहीं होना चाहिए। बॉटम बार का लैप हमेशा सपोर्ट या बीम के पास दिया जाता है, जबकि टॉप बार का लैप बीम के पास न होकर स्पैन के बीच में होना चाहिए।
5. समय से पहले शटरिंग और बल्लियां (Props) हटाना
ठेकेदार को अगली साइट पर सामान भेजना होता है, इसलिए वे 7-8 दिनों में ही छत के नीचे की बल्लियां खोल देते हैं। पहले 7 दिनों में कंक्रीट अपनी क्षमता का केवल 65% हिस्सा ही हासिल कर पाता है। समय से पहले सहारा हटाने से स्लैब पर सेल्फ-वेट (खुद का वजन) आ जाता है, जिससे छत में स्थायी झुकाव (Creep Deflection) आ जाता है जिसे कभी ठीक नहीं किया जा सकता।
IS 456:2000 (Clause 11.3) के अनुसार शटरिंग हटाने का अनिवार्य समय
| स्ट्रक्चरल एलिमेंट का प्रकार | न्यूनतम समय (OPC सीमेंट के लिए) | PPC सीमेंट की स्थिति में |
|---|---|---|
| कॉलम, दीवार और बीम के खड़े साइड्स | 16 से 24 घंटे | 24 से 36 घंटे |
| स्लैब का बॉटम (यदि नीचे बल्लियां लगी रहें) | 3 दिन | 4 से 5 दिन |
| बीम का बॉटम (यदि बल्लियां लगी रहें) | 7 दिन | 8 से 10 दिन |
| स्लैब की बल्लियां (Props) — 4.5 मीटर स्पैन तक | 7 दिन | 10 दिन |
| स्लैब की बल्लियां (Props) — 4.5 मीटर से अधिक स्पैन | 14 दिन | 14 से 18 दिन |
| बीम और आर्च की बल्लियां — 6 मीटर से अधिक स्पैन | 21 दिन | 21 से 28 दिन |
छत की ढलाई के 24 घंटे बाद सीमेंट की छोटी क्यारियां (Ponding) बनाकर कम से कम 14 दिनों तक लगातार पानी भरा रखें। वाइब्रेटर का इस्तेमाल संतुलित करें; अत्यधिक वाइब्रेशन से सीमेंट स्लरी अलग हो जाती है और गिट्टी नीचे बैठ जाती है (Segregation)।
वास्तु-सम्मत 2D फ्लोर प्लान, वर्किंग ड्रॉइंग्स, कॉलम लेआउट और 3D फ्रंट एलिवेशन के लिए आप शिवनाथ डिजाइन एंड कंस्ट्रक्शन, संपतचक (पटना) की टेक्निकल टीम से संपर्क कर सकते हैं।