प्लास्टर कितने mm का कहाँ देना चाहिए? IS 1661 के नियम, सीमेंट-बालू का सही अनुपात और 5 बड़ी गलतियां
भारतीय मानक ब्यूरो के कोड IS 1661:1972 (Code of Practice for Application of Cement and Cement-Lime Plaster Finishes) में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि मकान के किस हिस्से में कितने मिलीमीटर का प्लास्टर होना चाहिए और मसाले का सही अनुपात क्या होना चाहिए।
मकान के किस हिस्से में कितने mm का प्लास्टर देना चाहिए?
छत की निचली सतह (Slab Soffit) और आरसीसी बीम के नीचे कभी भी मोटा प्लास्टर नहीं करना चाहिए। छत पर कंक्रीट की सतह पहले से सपाट होती है। यहाँ केवल शटरिंग के निशानों और छोटी खामियों को ढकने के लिए 6mm का सिंगल कोट प्लास्टर दिया जाता है।
मसाले का अनुपात (Ratio): इसके लिए 1:3 या 1:4 (1 भाग सीमेंट : 3 या 4 भाग बारीक छनी हुई बालू) का थोड़ा तेज मसाला इस्तेमाल होता है।
कमरे के अंदर की ईंट की दीवार का वह हिस्सा जो चिनाई करते वक्त सूत और साहुल में बिल्कुल सीधा (Even Face) बनाया गया हो, वहाँ 12mm का प्लास्टर किया जाता है।
मसाले का अनुपात (Ratio): अंदर की दीवारों के लिए 1:5 या 1:6 (1 बैग सीमेंट : 5 या 6 बैग मीडियम बालू) सबसे आदर्श और किफायती माना जाता है।
9 इंच की ईंट की दीवार जोड़ते समय मिस्त्री एक तरफ तो सूत बांधकर दीवार को सीधा रखता है, लेकिन दूसरी तरफ ईंटों का साइज थोड़ा आगे-पीछे (Rough Side) निकल जाता है। इसी तरह 4 इंच की पार्टीशन वॉल के खुरदुरे हिस्से पर ईंटों के उतार-चढ़ाव को बराबर करने के लिए 15mm का प्लास्टर जरूरी होता है।
मसाले का अनुपात (Ratio): इसके लिए 1:5 या 1:6 का रेश्यो रखा जाता है।
बाहरी दीवारें सीधे तेज धूप, मूसलाधार बारिश और हवा के थपेड़ों को झेलती हैं। अगर बाहरी प्लास्टर कमजोर या सिंगल कोट में 10-12mm का होगा, तो बारिश का पानी ईंटों में घुसकर अंदर कमरों की सीलन (Dampness) बना देगा।
बाहरी दीवार पर हमेशा 20mm का डबल-कोट प्लास्टर होना चाहिए:
- पहला कोट (Rough Coat): 12mm से 14mm का रफ कोट (1:4 या 1:5 रेश्यो) जिसमें वाटरप्रूफिंग केमिकल (जैसे Dr. Fixit LW+) मिला हो। इसे सूखने से पहले सतह पर कंघी या तार से स्क्रैच (Key) बना दिए जाते हैं।
- दूसरा कोट (Finishing Coat): पहले कोट के 24 से 48 घंटे बाद 6mm से 8mm का फिनिशिंग कोट (1:3 या 1:4 रेश्यो) चढ़ाया जाता है।
IS Code के अनुसार प्लास्टर थिकनेस और मिक्सिंग चार्ट
| स्ट्रक्चर का हिस्सा | प्लास्टर की मोटाई | सीमेंट : बालू अनुपात | क्योरिंग (तलाई) की न्यूनतम अवधि |
|---|---|---|---|
| छत की निचली सतह (RCC Ceiling) | 6 mm | 1 : 3 या 1 : 4 | 7 से 10 दिन |
| अंदरूनी दीवार (सपाट/प्लेन साइड) | 12 mm | 1 : 5 या 1 : 6 | 7 से 10 दिन |
| अंदरूनी दीवार (खुरदुरी/रफ साइड) | 15 mm | 1 : 5 या 1 : 6 | 7 से 10 दिन |
| बाहरी दीवार (External Weather Face) | 20 mm (दो कोट में) | 1:4 (वाटरप्रूफिंग केमिकल युक्त) | 10 से 14 दिन |
प्लास्टर शुरू करने से पहले के 5 जरूरी नियम (Pre-Plaster Preparation)
चिकने कंक्रीट के खंभों या बीम पर मसाला सीधे नहीं चिपकता। प्लास्टर शुरू करने से 2 दिन पहले छेनी-हथौड़े से कंक्रीट पर कट लगाए जाते हैं जिसे 'टाचा' (Hacking) कहते हैं। IS Code के अनुसार प्रति वर्ग फुट में कम से कम 25 से 30 कट होने चाहिए, जिनकी गहराई 2 से 3mm हो।
कंक्रीट और ईंट का तापमान बढ़ने-घटने पर फैलने का गुण (Thermal Expansion) अलग-अलग होता है। इसलिए बीम और ईंट की दीवार के जोड़ पर हमेशा सीधी दरार आती है। इस दरार को रोकने के लिए जोड़ पर कम से कम 6 से 8 इंच चौड़ी लोहे या फाइबर की चिकन मेश (जाली) कील और वाशर से ठोकनी चाहिए, फिर उसके ऊपर प्लास्टर करना चाहिए।
सूखी ईंट बहुत प्यासी होती है। अगर सूखी दीवार पर सीधे मसाला फेंकेंगे, तो ईंट प्लास्टर के मसाले का सारा पानी तुरंत सोख लेगी। पानी खत्म होते ही सीमेंट का हाइड्रेशन रुक जाएगा और प्लास्टर कमजोर होकर भुरभुरा हो जाएगा। प्लास्टर करने से 24 घंटे पहले और काम शुरू होने से 2 घंटे पहले दीवार को पानी से पूरी तरह तर कर लें।
जब ईंट की चिनाई हो रही हो, तभी ताजे मसाले को 10mm से 12mm अंदर तक खुरच देना चाहिए। इन खांचों में जब प्लास्टर का नया मसाला घुसता है, तो वह दीवार के साथ मजबूत पकड़ (Mechanical Interlocking) बनाता है।
कमरे की चारों दीवारों को 90 डिग्री के समकोण (Right Angle) और साहुल में रखने के लिए 8-8 फीट की दूरी पर 2x2 इंच के मसाले के ठीहे (Bull Marks) लगाए जाते हैं। बिना ठीहे के किया गया प्लास्टर देखने में लहरदार दिखता है और बाद में टाइल्स या अलमारी लगाते वक्त दीवार टेढ़ी नजर आती है।
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2. सूखा सीमेंट का लेप (नीरू/घोल) ज्यादा लगाना: दीवार पर तुरंत चिकनाहट लाने के लिए मिस्त्री ऊपर से प्योर सूखे सीमेंट का लेप लगा देते हैं। यह लेप सूखते ही खिंचाव पैदा करता है और पूरी दीवार पर मकड़ी के जाले जैसी दरारें (Hairline Cracks) पड़ जाती हैं।
3. 1 घंटे से ज्यादा देर तक रखा मसाला लगाना: सीमेंट में पानी मिलने के 30 से 45 मिनट के भीतर उसका इनिशियल सेटिंग टाइम शुरू हो जाता है। अगर मजदूर सुबह 9 बजे ढेर सारा मसाला बनाकर छोड़ देते हैं और 11 बजे तक वही सूखा-गीला करके लगाते हैं, तो उस मसाले की स्ट्रेंथ 40% तक खत्म हो चुकी होती है। उतना ही मसाला बनवाएं जो 45 मिनट में खत्म हो जाए।
4. क्योरिंग में कंजूसी: प्लास्टर होने के अगले दिन से कम से कम 7 से 10 दिनों तक दिन में 2 से 3 बार भरपूर पानी का छिड़काव करें। यदि तराई नहीं हुई, तो सबसे महंगे सीमेंट का प्लास्टर भी खुरच कर गिर जाएगा।